जगज्जालपालं चलत्कण्ठमालं, शरच्चन्द्रभालं महादैत्यकालं
नभोनीलकायं दुरावारमायं, सुपद्मासहायम् भजेऽहं भजेऽहं ||
सदाम्भोधिवासं गलत्पुष्पहासं, जगत्सन्निवासं शतादित्यभासं
गदाचक्रशस्त्रं लसत्पीतवस्त्रं, हसच्चारुवक्त्रं भजेऽहं भजेऽहं ||
रमाकण्ठहारं श्रुतिव्रातसारं, जलान्तर्विहारं धराभारहारं
चिदानन्दरूपं मनोज्ञस्वरूपं, ध्रुतानेकरूपं भजेऽहं भजेऽहं ||
जराजन्महीनं परानन्दपीनं, समाधानलीनं सदैवानवीनं
जगज्जन्महेतुं सुरानीककेतुं, त्रिलोकैकसेतुं भजेऽहं भजेऽहं ||
कृताम्नायगानं खगाधीशयानं, विमुक्तेर्निदानं हरारातिमानं
स्वभक्तानुकूलं जगद्व्रुक्षमूलं, निरस्तार्तशूलं भजेऽहं भजेऽहं ||
समस्तामरेशं द्विरेफाभकेशं, जगद्विम्बलेशं ह्रुदाकाशदेशं
सदा दिव्यदेहं विमुक्ताखिलेहं, सुवैकुण्ठगेहं भजेऽहं भजेऽहं ||
सुरालिबलिष्ठं त्रिलोकीवरिष्ठं, गुरूणां गरिष्ठं स्वरूपैकनिष्ठं
सदा युद्धधीरं महावीरवीरं, महाम्भोधितीरं भजेऽहं भजेऽहं ||
रमावामभागं तलानग्रनागं, कृताधीनयागं गतारागरागं
मुनीन्द्रैः सुगीतं सुरैः संपरीतं, गुणौधैरतीतं भजेऽहं भजेऽहं ||
फलश्रुति
इदं यस्तु नित्यं समाधाय चित्तं, पठेदष्टकं कण्ठहारम् मुरारे:
स विष्णोर्विशोकं ध्रुवं याति लोकं, जराजन्मशोकं पुनर्विन्दते नो||
नभोनीलकायं दुरावारमायं, सुपद्मासहायम् भजेऽहं भजेऽहं ||
सदाम्भोधिवासं गलत्पुष्पहासं, जगत्सन्निवासं शतादित्यभासं
गदाचक्रशस्त्रं लसत्पीतवस्त्रं, हसच्चारुवक्त्रं भजेऽहं भजेऽहं ||
रमाकण्ठहारं श्रुतिव्रातसारं, जलान्तर्विहारं धराभारहारं
चिदानन्दरूपं मनोज्ञस्वरूपं, ध्रुतानेकरूपं भजेऽहं भजेऽहं ||
जराजन्महीनं परानन्दपीनं, समाधानलीनं सदैवानवीनं
जगज्जन्महेतुं सुरानीककेतुं, त्रिलोकैकसेतुं भजेऽहं भजेऽहं ||
कृताम्नायगानं खगाधीशयानं, विमुक्तेर्निदानं हरारातिमानं
स्वभक्तानुकूलं जगद्व्रुक्षमूलं, निरस्तार्तशूलं भजेऽहं भजेऽहं ||
समस्तामरेशं द्विरेफाभकेशं, जगद्विम्बलेशं ह्रुदाकाशदेशं
सदा दिव्यदेहं विमुक्ताखिलेहं, सुवैकुण्ठगेहं भजेऽहं भजेऽहं ||
सुरालिबलिष्ठं त्रिलोकीवरिष्ठं, गुरूणां गरिष्ठं स्वरूपैकनिष्ठं
सदा युद्धधीरं महावीरवीरं, महाम्भोधितीरं भजेऽहं भजेऽहं ||
रमावामभागं तलानग्रनागं, कृताधीनयागं गतारागरागं
मुनीन्द्रैः सुगीतं सुरैः संपरीतं, गुणौधैरतीतं भजेऽहं भजेऽहं ||
फलश्रुति
इदं यस्तु नित्यं समाधाय चित्तं, पठेदष्टकं कण्ठहारम् मुरारे:
स विष्णोर्विशोकं ध्रुवं याति लोकं, जराजन्मशोकं पुनर्विन्दते नो||

बहुत सटीक लिखा है इसमें संधियों का सही प्रयोग है।
ReplyDeleteकृपया इसका हिंदी अर्थ भी दीजिये ।
Right
DeleteVery very nice ..each and every word is clear
ReplyDeleteVery clear, really
DeleteMy favourite vishnu shatram
ReplyDeleteJai ho shree hari Vishnu Ji ki Jai ho
ReplyDeleteॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ReplyDeleteVery clear.🙏🙏
ReplyDeletevery beautiful..really..jai shri hari vishnu..jagat ke palanhar.
ReplyDeleteअद्भुत रोमांचक स्वर अद्भुत आनन्दित
ReplyDeleteLove it
ReplyDeleteHari OM
ReplyDeleteOm Namo Bhagwate Vasudevaya
ReplyDeleteHari Omm
ReplyDeletePlease mujhe ye janna hai Hari Stotram me Chalatkanth malam hai ya Rajat kanth malam hai ek or samadhan chahiye apki badi kripa hogi
ReplyDeleteMahamrityunjay mantra me
Bandhnan hai ya Bandhnat hai